गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011

pashu/pakshi

जलचर थल चर,नभचर प्राणियों में विशेष रूप से पशुओं ओर पक्षियों में
अंतर समझने लिए कुछ बातें विचारणीय है .[१] पशुओं के शरीर पर बाल होते है
[[[२]पक्शियो के शरीरपर पंख हो ते है [३]मादा पशु बच्चो को जन्म देती है .मादा पक्षी अंडे
देती है [४]मादा पशु अपने बच्चेको दूध पिलाती है मादा पक्षी  अंडे  सेती है .[५] पशु उड़ नहीं सकते
सारांश बाल वाले .दूध पिलानेवाले बच्चोको जन्म देने वाले पशु /अंडे देने वाले
पंख वाले पक्षी ---एक पक्षी जिस्कानाम चमगादर[व्ल्वागुल] है ऐसा पक्षी है जो उड़ता
है उसके पंख होते है पक्षी ही किन्तु पशुओं के समसं बच्चो को जन्म देता है और दूध पिलाता
है .****एक कहावत है किहवा का रुख देख करचलना चाहिए किन्तु कभीकभी
कुछ लोग जिधर बम उधर हंमका नारा लगाते है /किसी युग में पशुओं और पक्षियों
के बिच युद्ध हुआ /युद्धमे कभी पशु जीतते और कभी पक्षी /चमगादड़ पशु जीतते तो
उनकी तरफ जामिलते और अपने आपको पशु बताते और पक्षी जीतते तो उनके
विजय जश्न में सम्मिलित हो ते /////कई वर्षोके युद्ध के दुश्परिनामोको भोगते भोगते
पशु पक्षियों ने समझोता कर लिया /युद्ध एक शान्ति कीसर्जना की पूर्व तयारी
है //चमगादड़ ने ऐसे में पशुओं पशुयो के दल में जाना चाहातो उसको पक्षी बता कर
भगादिया तथा पक्षियों ने भी उसे दुत्कार दिया //पशु पक्षी सभी उसका अपमान करने लगे
दिन के समय वहअपना मुंह छिपाता फिरता है एवं अँधेरे स्थान पर उलटा लटका
रहाता है रात के अंधेर में ही भोजन पानी के लिए निकलता है 

सोमवार, 10 अक्टूबर 2011

ladaka hoga

भ विष्यवाणी ..गर्भस्थ शिशु लडका होगा की लडकी यह जिग्यासागर्भके प्रथम मॉस से ही होती है 
पुत्र हेतु हर कोइ इच्छुक होता है /यदि भेंस ब्याये तो ईछा होती  है किमादा हो /न्र भेंस को कोइ नही 
पसंद करता /गायके विषयमें भी बछड़े की कामना  होती है /बछड़ा हुवा तो उत्तम और यदि बछिया 
हु ई तो संतोष  चलो खुटाबड़ा /गाय माता गोमती बेटा गणेश भेंस रांड डाकनपादाहुआ पापी 
यदि इन पशुओने मनोवांछित सन्तान नही दी तो भी कोइ बात नही किन्तु बहुने कन्या 
जाई तो पूरा परिवार परिवार दुखी हो जाता है /ग्रामीण क्षेत्रोमेपरसुती गृह में सहायिका/नर्स 
द्वारा ही पता चलता था किलडका हुआ या लडकी /बच्चे कीकिलकारी के बाद लड़का 
लड़की होनेका संकेत विशेष तरह से दिया जाता था /यदि  लड़का हुआ तो थाली को 
लकड़ी से पिटकर बजाया जाता था और लडकी होनेपर बांस का सूप बजाया जाता था 
लडके की तमन्ना में महिलाको गर्भ स्थापना के पूर्व और पश्चात तरह तरह की द
वाइयां 
खिलाईजाती है और तरह तरह के टोटके किये जाते हैं कई साधू संतो  देवी देवताओं 
के द्वार पर मत्था टेका जाता है /ऐसे में एक संतजी पुत्र होगाकि पुत्री  की भविष्य वाणी 
करताथावे भविष्य वाणी की फ़ीस १००रुपिया लेताथा/यदि उसकी भविष्य वाणी  गलत 
निकती तो २००रुपिय वापिस देताथा /उसकी कई भविष्य वानियाँ गलत भी निकलतिथि
फिर भी संत कभी घटे में नही रहताथा /कारण तर्क पूर्ण है वे गर्भवती के कानमें लड़का 
कहतेथेउन्हें लड़का लडकी जन्म अनुपाटका ज्ञान था उन हे पता था कि५०% से अधिक 
लडके जन्म लेते है और उनकी भविष्य वाणी का व्यापारखूब   फला फुला /वैसे 
पत्र पुत्री का निर्धारण गुण सूत्र के आधार पर होताहै /गर्भस्थ शिशु का लिंग निर्धारण 
दो माह के बाद होताहै अत इस अवधि के पूर्व लिंग निर्धारण हेतु यदि कोइ उपचार 
कियाजाता है तो सफल हो ने कीसम्भावना हो सकती है .पुत्र की इच्छा रखनेवाली महिलाये 
यदि सोनोग्राफी न कराकर लिंग परिवर्तन कारीदवाई किसी  प्रमाणित व्यक्ति से लेकर सेवन 
कर सकती है /यदि गर्भस्थ शिशु नर है तो उत्तम ओषदीप्रयोग से लड़का होगया तो अहोभाग्य 
और कन्या जन्म ही होता है तोमानलो हरी करे सो खरी /हाँ लुटरे धोके बाजों से सावधान 
रहें 

शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

registhan

जिन लोगो को भूगोल का प्रारम्भिक ज्ञान है वे जानते है की महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर अयन रेखाओं 
पर प्राय रेगिस्थान पाए जाते है  साथ ही वे इसके कारणों को भी जानते है /वैज्ञानिक कारणों को भली भांति 
न भी जानते हो फिर भी इतना तो जानते ही है किपृथ्वी का अपनी धुरी पर परिक्रमण भी   एक कारन है 
               प्राकृतिक घटनाओ के विषय में प्राचीन कालमें वास्तविक एवं परमा निक जानकारी के अ भाव में 
कई तरह कि कल्पनाये की जाकर कुछ कहानिया घड ली गईहै 
             ऐसीही एक क हानी प्रस्तुत है सूर्य देव कीपत्नी का नाम प्रथ्वी था /उनकी सन्तान का नाम पृथा था 
पृथा माता पिता की बहुत  लाडली सन्तान थी /जब पृथा कुछ बड़ा हुआ तो उसे लगा किवह भी अपने पिता 
के समान रथ चलासकता है /एक दिन उसने पिता सूर्य से रथ चलानेकि इच्छा बताई /पहले तो पितानेउसे 
इंकार कर दिया किन्तु एक तो बा ल हठऔर दुसरे पुत्र मोह /द्रोणाचार्य का पुत्र मोह तो जग प्रसिद्ध है पुत्र मोह 
में ही अस्त्र त्याग कर प्राण गंवाए //सूर्य ने घोड़ों की बागडोर लडके को दे दी .पृथा थातो अभी बच्चा ही 
उस से ठीक से रथका सन्तुल बना नही कही पर रथ पृथ्वी से बहुतदूर चलागया

तो  कही पर पृथ्वी के बहुत निकट आगया /जिन जिन भागों के निकट सूर्य का रथ पृथ्वी के अधिक निकट 
आगया वहांवहाँ  का भू भाग रेगिस्थान बन गया
       विश्व के अन्यभागों में भी ऐसी या इस से मिलती जुलती kahani vishv ke any desho me bhi
ho skti hai 

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2011

aate aadar nahi diyo

प्रकरटी कृषि व् नक्षत्रो के  परस्पर सम्बन्धो के बारे में प्राचीन कालसे विद्वानों ने अध्य यं न करनिष्कर्ष 
निकालेहै जो मो खिक रूप से यात्रा करते हु ये सर्वत्र प्रचिलित हो गये है /कुछ ऐसे ही निष् कर्शो  का 
लोकोक्तियों के रूपमें  आनंद लीजिये 
              [१] मृग नक्षत्र की बोवनी हो ने पर फसल उत्तम होती है 
             [२] अश्लेशा बाले और मघा वाले अरथात आश्लेषा नक्षत्र में फसल के कईपो धे अचानक मुर्झाजा ते 
                  है किन्तु अगले नक्षत्र मघा में उन पो धो की मुरझा हट दू र हो जाती है 
             [3]पुख भर कु ख पुष्य नक्षत्र में हरी घास इतनी हो जाती है कीपशु ओं को भर पेट चारा मिलता है 
            [४]स्वाति नक्षत्र की एक बूंद का बड़ा महत्व है इस वर षा जल की एक बंद सिप के मुहं में मोती 
                  केलेके पेड़ में कपूर सर्प के मुहं में जाकर विष बनती है चातकपक्षी केवल इसी जलका पान
                  करता है /स्वाति चना हो वे घना  स्वाति की वर्षा से चने की फसल  बड़ी या हो टी है 
           [५]आदराभ रे खाल्या खोदरा  **इस नक्षत्र में अछि वर्षा होती है 
           [६]आते आदर नही दियो जाते दियो न हस्थ तो दो नो पछि ता ये गे ये पाहुनो वो ग्रहस्थ 
                   यदि महिमान के आते समय उसका सम्मान नही किया और उसके जाते समय हाथ जोड़ कर 
                  विदा नही किया तो पहुना और ग्रहस्थ दो नो को पछताना पड़ेगा ///यदि आदरा नक्षत्र के प्रारम्भ 
                   में और हस्त नक्षत्र के अंतिम दि नो में वरषानही हो तो अकाल पड़ेगा //इस कार  न  पाहुना और 
                 ग्रहस्थ दो नो दुखी हों गे 
            [७] हस्त शब्द से हाथीका  बोध होता है इस नक्षत्र मेंक ही कही वरषा हो ती है किन्तु जिध र भी होती है 
               उधर हानि हानि ही होती हैजिधर  भी हाथी की सूंडघुमती है उध रवर्षा  होती है 
            [८]हस्त नक्षत्र में सर्प काटने की घटनाये बहुत होती है कार न की जमीन में पानी ही पानी हो जा ने से 
                     वे जमीन के उपर आजाते है और प्राणी उसके शिकार होजाते है //यदि इस नक्षत्र में जब  बादल
                     गरजे ठीक उसी समय कोई महिला अपने दो नो हाथो के निशानदीवाल पर बना दे तो इस प्रकार 
                      की घटना  ये उस क्षेत्र विशेष में प्राय नही होती 

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

tejaji

ते जा जी की लोक कथा के समान नरसिंह कि  लोक कथा  भी प्र च लितहै . ना  यक नर सिं ह का 
जन्म स्थान झ गडी मध्य प्रदेश के खरगोनजी ले में ची  तोड़ भू सा वलअंतर प्राण ति य मार्ग प र 
बी स टा न ----ची रीया के मध्य स्थित  है वर्तमान में इस क्षे त्र में एक बहुतही प्राची न मन्दिर 
स्थित है यह मन्दिर माँ को समर्पित है /पूर्व समय में यह शा स  कोकी कु ल दे वि आराध्य देवी 
रही है रा जा सबल सिंह ने अपनी पुत्री के वि वाह में समस्त दे वि दे व् ता ओ को तथा प्राणी मात्र 
को आमंत्रित कि या था /उसउपलक्ष में एक यग्य का आयो जन कि या  गया था /उस यग्य में जो 
भस्म बनी उससे दे वि प्रति माँ एवं मन्दिर का निर्माण कि या गया 
               ग्राम झ ग डी ग्राम पंचायत मो हं पु रा वि कास खंड भगवान पु रा जिला खरगोन निमाड़ 
में प्रति वर्ष नवरात्रि में में ले का आयो जन हो ता है 
माता भ ग वती की  पर सि धी दूर दूर तक है/जन सामान्य का विश वास है कियहा  मन्नत मांगने 
पर वर्ष भर में उ सकी पूर्ति  अवश्य ही हो जाती है /