प्रकरटी कृषि व् नक्षत्रो के परस्पर सम्बन्धो के बारे में प्राचीन कालसे विद्वानों ने अध्य यं न करनिष्कर्ष
निकालेहै जो मो खिक रूप से यात्रा करते हु ये सर्वत्र प्रचिलित हो गये है /कुछ ऐसे ही निष् कर्शो का
लोकोक्तियों के रूपमें आनंद लीजिये
[१] मृग नक्षत्र की बोवनी हो ने पर फसल उत्तम होती है
[२] अश्लेशा बाले और मघा वाले अरथात आश्लेषा नक्षत्र में फसल के कईपो धे अचानक मुर्झाजा ते
है किन्तु अगले नक्षत्र मघा में उन पो धो की मुरझा हट दू र हो जाती है
[3]पुख भर कु ख पुष्य नक्षत्र में हरी घास इतनी हो जाती है कीपशु ओं को भर पेट चारा मिलता है
[४]स्वाति नक्षत्र की एक बूंद का बड़ा महत्व है इस वर षा जल की एक बंद सिप के मुहं में मोती
केलेके पेड़ में कपूर सर्प के मुहं में जाकर विष बनती है चातकपक्षी केवल इसी जलका पान
करता है /स्वाति चना हो वे घना स्वाति की वर्षा से चने की फसल बड़ी या हो टी है
[५]आदराभ रे खाल्या खोदरा **इस नक्षत्र में अछि वर्षा होती है
[६]आते आदर नही दियो जाते दियो न हस्थ तो दो नो पछि ता ये गे ये पाहुनो वो ग्रहस्थ
यदि महिमान के आते समय उसका सम्मान नही किया और उसके जाते समय हाथ जोड़ कर
विदा नही किया तो पहुना और ग्रहस्थ दो नो को पछताना पड़ेगा ///यदि आदरा नक्षत्र के प्रारम्भ
में और हस्त नक्षत्र के अंतिम दि नो में वरषानही हो तो अकाल पड़ेगा //इस कार न पाहुना और
ग्रहस्थ दो नो दुखी हों गे
[७] हस्त शब्द से हाथीका बोध होता है इस नक्षत्र मेंक ही कही वरषा हो ती है किन्तु जिध र भी होती है
उधर हानि हानि ही होती हैजिधर भी हाथी की सूंडघुमती है उध रवर्षा होती है
[८]हस्त नक्षत्र में सर्प काटने की घटनाये बहुत होती है कार न की जमीन में पानी ही पानी हो जा ने से
वे जमीन के उपर आजाते है और प्राणी उसके शिकार होजाते है //यदि इस नक्षत्र में जब बादल
गरजे ठीक उसी समय कोई महिला अपने दो नो हाथो के निशानदीवाल पर बना दे तो इस प्रकार
की घटना ये उस क्षेत्र विशेष में प्राय नही होती
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