शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

registhan

जिन लोगो को भूगोल का प्रारम्भिक ज्ञान है वे जानते है की महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर अयन रेखाओं 
पर प्राय रेगिस्थान पाए जाते है  साथ ही वे इसके कारणों को भी जानते है /वैज्ञानिक कारणों को भली भांति 
न भी जानते हो फिर भी इतना तो जानते ही है किपृथ्वी का अपनी धुरी पर परिक्रमण भी   एक कारन है 
               प्राकृतिक घटनाओ के विषय में प्राचीन कालमें वास्तविक एवं परमा निक जानकारी के अ भाव में 
कई तरह कि कल्पनाये की जाकर कुछ कहानिया घड ली गईहै 
             ऐसीही एक क हानी प्रस्तुत है सूर्य देव कीपत्नी का नाम प्रथ्वी था /उनकी सन्तान का नाम पृथा था 
पृथा माता पिता की बहुत  लाडली सन्तान थी /जब पृथा कुछ बड़ा हुआ तो उसे लगा किवह भी अपने पिता 
के समान रथ चलासकता है /एक दिन उसने पिता सूर्य से रथ चलानेकि इच्छा बताई /पहले तो पितानेउसे 
इंकार कर दिया किन्तु एक तो बा ल हठऔर दुसरे पुत्र मोह /द्रोणाचार्य का पुत्र मोह तो जग प्रसिद्ध है पुत्र मोह 
में ही अस्त्र त्याग कर प्राण गंवाए //सूर्य ने घोड़ों की बागडोर लडके को दे दी .पृथा थातो अभी बच्चा ही 
उस से ठीक से रथका सन्तुल बना नही कही पर रथ पृथ्वी से बहुतदूर चलागया

तो  कही पर पृथ्वी के बहुत निकट आगया /जिन जिन भागों के निकट सूर्य का रथ पृथ्वी के अधिक निकट 
आगया वहांवहाँ  का भू भाग रेगिस्थान बन गया
       विश्व के अन्यभागों में भी ऐसी या इस से मिलती जुलती kahani vishv ke any desho me bhi
ho skti hai 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें