बुधवार, 23 मई 2012

hajardasta

उल्लू को हजार दा स्ता भी कहा    जाता है .यह पक्षी जिस भी आवाज को सुन लेता है
व ही आवाज वैसी की वैसी अपने   मुह से निकाल   सकता है .प्राचीन समय में यह धारणा 
थी कि अगर कोई बच्चारा .त में रोता है और उसे  सुन कर कोई उल्लू उस आवाज की नक़ल 
करता है तो वह बच्चा बीमार रहने लगता है इस पक्षी के विषय में कई भ्रान्ति 
जनक कथाये प्रशिद्ध है कहाजाता है कि मादा उल्लू अपने अंडे फोड़ने के लिए पारस पत्थर 
का प्रयोग करती है .पारस  पत्थरकी खोज करने वालोने इस पक्षी के घोसलों को 
बहुत  उजाडा है .वैसे यह पक्षी भी उजाड़ स्थानों को पसन्द करताहै / 
तैमूर लंग गांवो बस्तियों को उजा ड़ता भारतमे बढता जारहा था/पराजित राजाओ  सेनापतियो 
व् सेना का उपयोग  स्थानों पर आक्रमण कर ने के लिए करताथा /एकबार एक उजाड़ गाँव 
के पास से जारहे थे /वहां एक वृक्ष  पर बैठे दो उल्लू औ को देखकर तैमूर लंग ने साथ में चलरहे 
पराजित राजा से पूछा तुम तो उल्लुऑ की भाषा जानते हो बताओ वे क्या बात कररहे है  साथ के राजा 
ने अपमानित महसूस हॉट हुए कह़ा हुजूर इन उल्लू ओ  एक नर उल्लू का पिता हैआउर दूसरा 
एक लड़की मादा उल्लू का  पिता है /नर उल्लू का पिता दहेज़ में पांच उजाड़ गांव की मांग कर 
रहा है /माआदा उल्लू का पिता बता रहा हैकि तैमूर लंग  बादशाह के हो ते हु  ये मुझे को ई 
चिंता  नही /में तुम्हे पांच की जगह दस उजाड़ गांव दे ने को तैयार हूँ 

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