शुक्रवार, 25 मई 2012

pachawa chor

बात  बहुत पुराने समय की है /जब छोटे छोटे राज्य हो ते थे रा जा वेश बदल कर रात में 
राजधानी में घूमते थे  और प्रजा के दुःख सुख की जानकारी लेते थे /उन्ही दिनों एक रात 
चार चोर चोरी करने के इरादेसे राज  धानी में आधी रात  को घूम रहे थे //उसी समय वहां 
का राजा राजधानी में भ्रमण कर रहाथा /राजाने चोरो को देख कर कुछ  निर्णय किया व
उनके साथ साथ चलने लगा /चोरो ने आपस में कहा आज हम सब अलग अलग स्थानों से 
इकट्ठे हु ये है अत अपने अपने गुण बता ये /एक ने कहा वह धन कहा रखाहै  उसका ठीक 
ठीक स्थान बता सकता है / दुसरेने वह चाहे जितनी मजबूत दीवाल हो उसे आसानी से तोड़ 
सकता है /तीसरे ने कहा में  पशु पक्षियों की बोली जानता हूँ अब उन्होंने साथ चल रहे चोथे 
व्यक्ति अर्थात राजा से उसके गुणों के बारेमे पुछा / राजा ने कहा मेरे इशारे पर फांसी पर 
चदाया गया व्यक्ति निचे उतार दिया जाता है पांचवे चोर ने बताया में एकबार जिस व्यक्ति 
को एक बार देख लू उसे कभी  भी किसी भी रूप में हो उसे पाहचन ले ता हु /कुछ दूर जाने पर एक कुते के भोकने पर साथी यो ने बोली पहचान ने वाले से कुत्ते के भोंकने का 
अर्थ पूछा /उसने बताया कि कुत्ता कह रहा है हम   लोगो मेसे कोई एक महत्त्व पूर्ण व्यक्ति है 
अन्य साथियों की सहायता से  खजाने की खोज कर दीवार तोड़ कर खजाने आकी चोरी कर 
वे लोग जाने लगे /इतने में राजा ने महल  में पहुँच कर संतरियो को आदेश देकर चोरोको 
पकडवा दिया 
                       सुबह दरबार में राजा ने उनकी अपराध संबंदी सुनवाई कर चारो को फासी की 
सजा सुनाई /उन चोरो में से एक चोर ने निवेदन किया की महाराज रातको चोरी करने हम 
 पांच व्यक्ति गए थे रा त में हमने अपने अपने गुण बताये थे /में जिस व्यक्ति को एकबार 
देख ले ता हु उसे  कही भी किसी भी वेश में हो पहचान ले ता हूँ /में चाहता हु वह व्यक्ति भी 
अपने  क हे गुण को सिद्ध करे *****और राजा ने ईशा रा किया व् उनकी सजा माफ हो गयी 

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