नरसिंह ने अपने मन ही मन श्राफ के डर से जो निश्चय किया था उस पर अडिग था /तेजल नार अपने प्रति पति
के इस व्यवहार से दू खिथी/कारन से अनजान तेजल ने सोचा कियदि मै उलटे कम करुँगी तो मुझे डांटने के
लियेतो मेरे से बात करेंगे यह सोचकर वह उलटे उलटे काम करने लगी जैसे लीपने के लिए गायके गोबर की
जगह गुड घीं से लीपना किन्तु उसके इन कामो से न तो नरसिंह नाराज हुआ और नहीं किसी प्रकार से
उस से कीई प्रकार का सम्पर्क रक्खा तेजल के दिमाग में एक से एक युक्तियाँ आती रही किन्तु वह नाहरसिंह को
आकर्षित न कर पाई इस के बावजूद वह प्रयत्न करतीरही /वर्षा ऋतू आई खेत बोने का समय आया नरसिंह ने
खेत में बिज बोने के लिएगांव की लड़की को बुलालिया /तेजल खुद बोने के लिए खेत पर पहुँच गई और उस लड़की को झगडा कर भगा दिया उसे लगाकि इसी लड़की के कारन ही उसका पति उसकी उपेक्षा करताहै वह दिन भर
बो ती रही /दिन भर में जहाँ क्विन्तलो अनाज बोना था वहा उसने थोड़े से अनाज में पूरा खेत बो दिया नरसिंह
देखता रहा किन्तु बोला कुछ नहीं /यह तो निश्ची तथा की फसल का न होना नरसिंह ने खेत में जाना बधकर
दिया किन्तु फसल का अंकुरण बढ़िया हुआ तब नरसिंह ने खेत में जाकर देखा तो आश्र्याचाकित हो गया
खेत निराने के समय तेजल खरपतवार तो खेत ही में रहनेदे और अनाज के पोधो को उखाड़कर फेखे
फिर भी फसल बहुत बढ़िया हुुई /लोगो को लगा की तेजलर के पास कोई चमत्कार है वे उसे देवी मानने लगे
अवसर था नहासिंह के छोटे भाई की शादी का /पुरे ग्राम को भोजन का निमंत्रण दिया तेजल ने
अपने प्रति गांव वालो का सम्मान भाव का लाभ लेते हुए गाँव वालो से कहा की वे भोजन तभी करे जब
नरसिंह तेजल से मांग कर घी परोसे /तेजल ने घी छुपाकर रख दिया /भजन के समय घी न मिलना पर लोगो
ने ऐना प्रस्ताव रक्खा /नरसिंह को मजबूरी में तेजल से घी मांगना पड़ा /नरसिंह के इस प्रकार बात का प्रभाव
तुरंत हु आ /और **************निरंतर
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