रविवार, 25 सितंबर 2011

samrpanh

समर्पण   आज इंटर नेट पर 2 ला ख से अधिक के व् ल हि न्दीभाषा अन्य देशी विदेशी भाषा के अलग /आज 
की इस भागम भाग जिन्दगी में की से इतन समय है किव ह इन सभी  बला गो को पड़सके /वर्त्तमान में कम्पुटर 
पर उन्ही लोगो कीपहुँच है जो से ली बरे टी है /उन्हें  साहिट य व् आस पास की घटना ओ ता ल्लू क न ही
ऐसे में एक और ब्लॉग को इंटर नेट पर प्रारंभ कर ने का कोई  औ ची त क्या /किन तू कभी कभी ऐस लगता 
है कि जो साही तय मो  खी क लिखित सा ही त य  यत्रतत्र बी ख रा है उसे  एक स था न पर एकत्र कर न 
हो   सक ता है बला गर ने यहाँ वहा से जो पड़ा व् जो या द् रहा उस को एक जगह एक त्र क रने का 

प्रया स कि या है में र यह ले ख न जी स में मेरा मो लिक कुछ नही है एक रसो ये का कर्म है कौन साअ नाज 
कहा उत पण हुवा उस को उस से कोई मतलब नही /उस ने धर मारथ भ न डा रे हे तू रसो इ तयार कर दी 
यहज रु रीनही कि भो जन हे तू को इ पदा रे 
                 अतः यह बला ग  उन लो गो को सम र पि त है जो कि सी भी का र न से इस बला ग तक प् हु च 
ग ये है 

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