समर्पण आज इंटर नेट पर 2 ला ख से अधिक के व् ल हि न्दीभाषा अन्य देशी विदेशी भाषा के अलग /आज
की इस भागम भाग जिन्दगी में की से इतन समय है किव ह इन सभी बला गो को पड़सके /वर्त्तमान में कम्पुटर
पर उन्ही लोगो कीपहुँच है जो से ली बरे टी है /उन्हें साहिट य व् आस पास की घटना ओ ता ल्लू क न ही
ऐसे में एक और ब्लॉग को इंटर नेट पर प्रारंभ कर ने का कोई औ ची त क्या /किन तू कभी कभी ऐस लगता
है कि जो साही तय मो खी क लिखित सा ही त य यत्रतत्र बी ख रा है उसे एक स था न पर एकत्र कर न
हो सक ता है बला गर ने यहाँ वहा से जो पड़ा व् जो या द् रहा उस को एक जगह एक त्र क रने का
प्रया स कि या है में र यह ले ख न जी स में मेरा मो लिक कुछ नही है एक रसो ये का कर्म है कौन साअ नाज
कहा उत पण हुवा उस को उस से कोई मतलब नही /उस ने धर मारथ भ न डा रे हे तू रसो इ तयार कर दी
यहज रु रीनही कि भो जन हे तू को इ पदा रे
अतः यह बला ग उन लो गो को सम र पि त है जो कि सी भी का र न से इस बला ग तक प् हु च
ग ये है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें