रविवार, 18 सितंबर 2011

TEJAJI ka itihas

तेजाजी के विषय में कई लोकगाथाएं प्रचलित है *उन के विषय में कुछ एतिहासिक तथ्य भी है /उनकी यह गाथा 
राजस्थान के अतिरिक्त जन्न्न्निगति व हरक्षेत्र में थोड़े बहोत परिवर्तन क्षेपक  से जुड़कर प्रच्चारित है 
राजस्थान के जाटोंके भाटो[वंशावली रखने वालो ]के अनुसार तेजाजी का जन्म ११३० विक्रमसंवत १०७४इसवि 
वारगुरुवार ग्राम खड़नालजाट जाती के धोलयागोत्र में हुआ था /इनके पिताश्री का नाम तहादजीऔर माता श्री का
रामकुंव रीबाई था *इनके पांचविवाह हुए थे पेमल इनकी पांचवी पत्नी थी /लोक गीत के अनुसार तेजाजी पेमल को 
लेने पनेर [ग्राम का नाम ]गए थे वहा मिनाओ ससे गुजारी की गायोको छुड़ा कर लेन में बहुत घायल हो गए 
और जमीं पर गिर गए जहाँ सर्प के काटनेइनकी म्रत्यु हो गई /भात भैरू के अनुसार माघ वद्दीचोअथ 
विक्रम संवत ११६० किशन गढ़ के पास सुरसराग्राम में निधन हुवा /***तेजाजी की सर्प काटने सम्बन्धी 
एक गाथा यह भी है किनाग नागिन आग में जल रहे थे तेजाजी ने उनको बचानेका प्रयत्न किया  नाग तो 
बच गया किन्तु नागिन को बचा न पाया *नाग ने इस से क्रोधित होकर तेजाजी को डसनाचाह *********
      एक कथा अनुसार तेजाजी गाएंचरर्हे थे /एक गायप्रतिदिन झुण्ड से कुछ देर के लिए अलग होकर 
कहीं चली जाती है  एक दिन उन्होंने उसका पीछा किया /देखने में आया कि वह गाय एक सर्प को दूध 
पिला रही थी तेजाजी कि उपस्थिति देख सर्प क्रोधित हुवा और धसने के लिए दोडा*तेजाजी ने सर्प को 
नियमित दूध पिलाने का वचन दिया  किन्तु एक दिन तेजाजी उसे दूध  फिलाने नहीं जा पाए उस से क्रोधित 
नाग ने उन्हें धसना  चाहा उस समय तेजाजी ससुराल जा रहे थे अत वहांसे लोट कर आने पर धसने का 
       

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