सोमवार, 19 सितंबर 2011

TEJAJI

तेजाजी की प्रशिधीएक लोक देवता के रूप में लगभग पुरे भारत में है /उनके बारे में कुछ स्थानों में कथा भेद हो 
सकते है /जाट  जाती के कुल भाट[वंशावली का विवरण रखने वाले ]के अनु सर तेजाजी का जन्म ग्राम 
खड नाल में जाट जाती में धो ल्यागोत्र में विक्रम संवत ११३०तद अनु सार१०७४इस्वि में हु आ था /इन के पिता 
का नाम तहादजीव् माताजी का नाम रामकुं वरी था /इन के पांचविवाह हु ये थे /सबसे छो टी पत्नी का नाम 
पेमल था /लोकगीतों के अनु सार जब तेजाजी पेमल को लेने उस के गाँव पनेर जा रहे थे tab रस्ते में 
जलते हुए नाग को बचानेकी घटना हुई /नागराज को वचन दे कर पनेर जाना हु आ जहा  गायोको 
छुड़ाने में तेजाजी बहुत घायल हो कर जमीं पर गिर गए वहा सर्प के काटने से उनकी मृत्यु हो गयी 
भाट भाई रो के अनु सार यह स्थान यह स्थान किशन गडके पास सुर सारा ग्राम है /यह दिन भादव 
वादी चोथविक्रम संवत ११६० है /तेजाजी को  सप काटने सम्बंधित एक गाथा यह भी है कि
नाग  नागिन आगमें जल रहे थे तेजाजी ने प्रयत्न     कर नाग को तो बचा ली या किन्तु नागिन 
को नहीं बचा सके /इस से करो धित  नाग ने तेजाजी को दसना चाहा/तेजाजी उस से वादा 
कर पेमल को लेने गए ****/एक कथा  के अनु सार तेजाजी गाये च रा ते थे /एक गाय नि प्रति झुण्ड 
से बाहरचली जा ती थी एक दिन तेजाजी ने उसका पीछा किया /उन्हों ने दे खा कि उस गाय 
का दू धएक सर्प पि रहा था *सर्प को तेजाजी कि उपस्ति थी का आभास  हो ने पर करो धित 
हो कर दस ना चाहा /तेज्जी ने उस नाग को प्र ती दिन दूध पिलाने का वादा किया /एक दिन तेजाजी कि सी 
का रन   दूध पि ला ने से चुक गाये इसी कारनह सर्प ने उसे धसा /
                  तेजाजी के जी वन से जू डी इन गाथा ओ में भी न्नता ओ  से उनके लोक देवता रूप पर 
कोई प्रभाव नहीं पड़ता /लाखो करोडो लोगो कि  अश्था उनपर  है उन के नाम से badhi

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